Papeeha Re Peev Ki Baani Na Bol - Meera Bhajan - Mantra, tantra, Stuti, Vandana, Bhajan Sadhna of Hindu Gods and Goddesses

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Papeeha Re Peev Ki Baani Na Bol - Meera Bhajan

Papeeha Re Peev Ki Baani Na Bol

पपैया रे पिवकी बाणि न बोल।
सुणि पावेली बिरहणी रे थारी रालेली पांख मरोड़।।

चांच कटाऊँ पपैया रे ऊपर कालोर लूण।
पिव मेरा मैं पिव की रे तू पिव कहै स कूण।।

थारा सबद सुहावणा रे जो पिव मेला आज।
चांच मंढाऊँ थारी सोवनी रे तू मेरे सिरताज।।

प्रीतम कूं पतियां लिखूं रे कागा तूं ले जाय।
जाइ प्रीतम जासूं यूं कहै रे थांरि बिरहण धान न खाय।।

मीरा दासी ब्याकुली रे पिव-पिव करत बिहाय।
बेगि मिलो प्रभु अंतरजामी तुम बिनु रह्यौ न जाय।।

शब्दार्थ-पिवी की = प्रियतम की। पावेली = पावेगी। रालैली = रक्वेगी। कालर = काला। मेला = मिल जाता। धान = धान्य, अन्न।

Disclaimer: The video and the lyrics content belong to their respective owners. I do not own any intellectual property rights. All the rights go to their respective content owners. I am just propagating. The sole purpose of this video is to deliver knowledge and devotion to those seeking sublimation and salvation.

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