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Papeeha Re Peev Ki Baani Na Bol - Meera Bhajan

6:11 AM
Papeeha Re Peev Ki Baani Na Bol

पपैया रे पिवकी बाणि न बोल।
सुणि पावेली बिरहणी रे थारी रालेली पांख मरोड़।।

चांच कटाऊँ पपैया रे ऊपर कालोर लूण।
पिव मेरा मैं पिव की रे तू पिव कहै स कूण।।

थारा सबद सुहावणा रे जो पिव मेला आज।
चांच मंढाऊँ थारी सोवनी रे तू मेरे सिरताज।।

प्रीतम कूं पतियां लिखूं रे कागा तूं ले जाय।
जाइ प्रीतम जासूं यूं कहै रे थांरि बिरहण धान न खाय।।

मीरा दासी ब्याकुली रे पिव-पिव करत बिहाय।
बेगि मिलो प्रभु अंतरजामी तुम बिनु रह्यौ न जाय।।

शब्दार्थ-पिवी की = प्रियतम की। पावेली = पावेगी। रालैली = रक्वेगी। कालर = काला। मेला = मिल जाता। धान = धान्य, अन्न।

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Bala main bairagan hoongi - Meerabai Bhajan

5:46 AM

Bala main bairagan hoongi 

Meerabai Bhajan


बाला मैं बैरागण हूंगी।
जिन भेषां म्हारो साहिब रीझे सोही भेष धरूंगी।


सील संतोष धरूं घट भीतर समता पकड़ रहूंगी।
गुरुके ग्यान रंगू तन कपड़ा मन मुद्रा पैरूंगी।
जाको नाम निरंजन कहिये ताको ध्यान धरूंगी।
या तन की मैं करूं कीगरी रसना नाम कहूंगी।
प्रेम पीतसूं हरिगुण गाऊं चरणन लिपट रहूंगी।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर साधां संग रहूंगी।


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Mere to Giridhar Gopal, MeeraBai Bhajan

5:34 AM

Mere to Giridhar Gopal

MeeraBai Bhajan
Voice -"Vanijairam ji"

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई

माई री! मैं तो लियो गोविंदो मोल।

कोई कहै छानै, कोई कहै छुपकै, लियो री बजंता ढोल।

कोई कहै मुहंघो, कोई कहै सुहंगो, लियो री तराजू तोल।

कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, लियो री अमोलिक मोल।

या ही कूं सब जाणत है, लियो री आँखी खोल।

मीरा कूं प्रभु दरसण दीज्‍यो, पूरब जनम को कोल।


मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई
छांड़ी दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई
संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई
चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई
मोती मूंगे उतार बनमाला पोई
अंसुवन जल सीचि सीचि प्रेम बेलि बोई
अब तो बेल फैल गई आंनद फल होई
दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई
माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई
भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई
दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही

mērē tō giridhara gōpāla dūsarō na kōī.
jākē sira mōra mukuṭa mērō pati sōī.
tāta māta bhrāta baṁdhu āpanō na kōī...
chām̐ṛi dī kula kī kāni kahā karihai kōī.
saṁtana ḍhiṁga baiṭhi-baiṭhi lōka lāja khōī..
cunarī kē kiyē ṭūka ōṛha līnhī lōī.
mōtī mūm̐gē utāra banamālā pōī..
am̐suvana jala sīṁci sīṁci prēma bēli bōī.
aba tō bēla phaila gaī āṇam̐da phala hōī..
dūdha kī mathaniyām̐ baṛē prēma sē bilōī.
mākhana jaba kāṛhi liyō chāchā piyē kōī..
bhagata dēkha rājī huī jagata dēkhi rōī.
dāsī "mīrā" lāla giridhara tārō aba mōhī..
- mīrābāī

mere to girdhar gopal dusro na koi
mere to girdhar gopal dusro na koi
jako sar mor mukat mere pati wohi
mere to girdhar gopal dusro na koi

koi kahe karo koi kahe goro
koi kahe karo koi kahe goro
mero kai ankhiyo khol
koi kahe halko koi kahe baharo
koi kahe halko koi kahe baharo
hiyo hai taraju tol
mere to girdhar gopal dusro na koi
mere to girdhar gopal dusro na koi

koi kahe chane koi kahe chaine
koi kahe chane koi kahe chaine
miyo hai bajuanta dhol
tan ka gahna sab kuch dina
tan ka gahna sab kuch dina
diya hai bajuband khol
mere to girdhar gopal dusro na koi
mere to girdhar gopal dusro na koi
jako sar mor mukat mere pati wohi
mere to girdhar gopal dusro na koi





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बिना प्रेम धीरज नहीं (भक्ति गीत) / Bina Prem Dheeraj Naahi Bhakti Geet

5:08 AM

Bhajan Lyrics
 (Written by Saint Kabir Das) : 
बिना प्रेम धीरज नहीं,
बिरह बिना बैराग..
सतगुरु बिना ना छुटिहै, 
मन मनसा की दाग
बिना प्रेम धीरज नहीं ..

नैना नीर भर नाइ आँख
रहत बसे निस जाम
पपीहा ज्यूँ पीहू पीहू करे ...
कब मिल होंगे त्राण.. त्राण..त्राण
बिना प्रेम धीरज नहीं ..

आई ना सकु तुझपे
सकु ना तुझ बुलाई
जियरा युही लैहु उड़ी..
बिरह तपाई ..तपाई ..तपाई..
बिना प्रेम धीरज नहीं 

Kabir Bhajan Meaning :
 जिसके ह्रदय में प्रेम न हो वह धैर्य का अर्थ नहीं समझ सकता और बिरह कि वेदना को केवल एक बैरागी ही समझ सकता है, प्रेम, धीरज, बिरह और बैराग का सम्बन्ध होता है, उसी प्रकार गुरु और शिष्य के ह्रदय का सम्बन्ध होता है,  बिना गुरु के शिष्य के मन से इच्छाओं को कोई और नहीं मिटा सकता है |


नरेंद्र (विवेकानंद) पहली बार रामकृष्ण से नवंबर 1881 को सुरेन्द्रनाथ मित्रा के घर सम्हारो में मिले, जहा नरेंद्र को संगीत गायन के लिए बुलाया गया था. परमहंस जी ने नरेंद्र से प्रभवित होकर उन्हें दक्षिणेश्वर आने को कहा.

Bhajan sung by Vivekanand during his first meeting with his Guru Sri Ramakrishna Paramahansa Dev to pay obeisance and respect.


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प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो, सूरदास का यह भक्ति गीत

4:15 AM


Song lyrics:
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो |
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ||

एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो |
सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो ||

एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो |
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो ||

एक माया एक ब्रह्म कहावत, सुर श्याम झगरो |
अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो ||

Meaning:
हे प्रभु मेरे अवगुणो को चित्त में न धरिये,
सभी प्राणी आपके लिए एक है, मुझे अपनी शरण में लीजिये,
एक लोहा पूजा थाल में भी होता और एक निर्दयी कसाई के हाथ में,
किन्तु पारस बिना भेद भाव के दोनों को ही खरा सोना में बदल देता है,
नदी नाले दोनों में पानी होता है किन्तु जब दोनों मिले तो सागर का रूप ले लेते है,
एक आत्मा एक परमात्मा, सुर दासजी श्याम ( भगवान्) से झगड़ते है ,
इस बार मुझे मायावी संसार से बचा लीजिये, मै अकेला इसे पार नहीं कर सकता.

prabhu mērē avaguṇa cita nā dharō |
samadarśī prabhu nāma tihārō, cāhō tō pāra karō ||

ēka lōhā pūjā mē rākhata, ēka ghara badhika parō |
sō duvidhā pārasa nahīṁ dēkhata, kaṁcana karata kharō ||

ēka nadiyā ēka nāla kahāvata, mailō nīra bharō |
jaba milikē dōū ēka barana bhayē, surasarī nāma parō ||

ēka māyā ēka brahma kahāvata, soora śyāma jhagarō |
abakī bēra mōhī pāra utārō, nahi pana jāta tarō ||




Disclaimer: This video and the bhajan are written, composed and sung by great saints and scholars. I am not the owner of this video nor the song. The purpose of this bhajan is to bring devotion and knowledge among masses seeking truth, peace, inner sanctity, solace and salvation. All the rights go to their respective content owners.

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Krishnashtakam by Jagadguru Adi Shankaracharya

11:08 PM


Krishnashtakam

 by Jagadguru Adi Shankaracharya



भजे  व्रजैक  मण्डनम्, समस्त  पाप  खण्डनम्,
स्वभक्त चित्त  रञ्जनम्, सदैव  नन्द  नन्दनम्,
सुपिन्छ   गुच्छ  मस्तकम् , सुनाद  वेणु  हस्तकम् ,
अनङ्ग  रङ्ग  सागरम्, नमामि  कृष्ण  नागरम् १

मनोज  गर्व  मोचनम्  विशाल  लोल  लोचनम्,
विधूत  गोप  शोचनम्  नमामि  पद्म  लोचनम्,
करारविन्द  भूधरम् स्मितावलोक  सुन्दरम्,
महेन्द्र  मान  दारणम्, नमामि  कृष्ण  वारणम्. २ 

कदम्ब  सून  कुण्डलम्  सुचारु  गण्ड  मण्डलम्,
व्रजान्गनैक  वल्लभम नमामि  कृष्ण  दुर्लभम.
यशोदया  समोदया  सगोपया  सनन्दया,
युतम सुखैक  दायकम् नमामि  गोप  नायकम्. ३

सदैव  पाद  पङ्कजम  मदीय  मानसे  निजम्,
दधानमुत्तमालकम् , नमामि  नन्द  बालकम्,
समस्त  दोष  शोषणम्, समस्त  लोक  पोषणम्,
समस्त  गोप  मानसम्, नमामि  नन्द  लालसम्. ४

भुवो  भरावतारकम्  भवाब्दि  कर्ण  धारकम्,
यशोमती  किशोरकम्, नमामि  चित्त  चोरकम्.
दृगन्त  कान्त  भङ्गिनम् , सदा  सदालसंगिनम्,
दिने  दिने  नवम् नवम्  नमामि  नन्द  संभवम्. ५

गुणाकरम्  सुखाकरम्  क्रुपाकरम्  कृपापरम् ,
सुरद्विषन्निकन्दनम् , नमामि  गोप  नन्दनम्.
नवीनगोप  नागरम नवीन  केलि  लम्पटम् ,
नमामि  मेघ  सुन्दरम्  तथित  प्रभालसथ्पतम्. ६

समस्त  गोप  नन्दनम् , ह्रुदम्बुजैक  मोदनम्,
नमामि  कुञ्ज  मध्यगम्, प्रसन्न  भानु  शोभनम्.
निकामकामदायकम्  दृगन्त  चारु  सायकम्,
रसालवेनु  गायकम, नमामि  कुञ्ज  नायकम्. ७

विदग्ध  गोपिका  मनो  मनोज्ञा  तल्पशायिनम्,
नमामि  कुञ्ज  कानने  प्रवृद्ध  वह्नि  पायिनम्.
किशोरकान्ति   रञ्जितम, द्रुगन्जनम्  सुशोभितम,
गजेन्द्र  मोक्ष  कारिणम, नमामि  श्रीविहारिणम . ८

यथा तथा यथा तथा  तदैव  कृष्ण  सत्कथा ,
मया  सदैव  गीयताम्  तथा  कृपा  विधीयताम.
प्रमानिकाश्टकद्वयम्  जपत्यधीत्य  यः पुमान ,
भवेत्  स  नन्द  नन्दने  भवे  भवे  सुभक्तिमान  ९

Look At the two different sanskrit style of writing. So does the bhajan changes its course of singing. The words are same but style of singing is changing. Sanskrit scholars will understand. I found this different style of writing in two different books. So I put both the style here for singing the hymns in different styles. One single mistake or change in writing the sanskrit hymns changes the course of recitation and singing.


भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
  स्वभक्तचित्तरंजनं सदैव नन्दनन्दनम् |
  सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं
  अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ||१||

मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं
  विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् |
  करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं
  महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णावारणम् ||२||

कदम्बपुष्प कुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं
  व्रजांगनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् |
  यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया
  युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ||३||

सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजं
दधानमुक्तमालकं नमामि नन्दबालकम् |
  समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं
  समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ||४||

भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं
  यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् |
  दृगन्तकान्तभंगिनं सदा सदालिसंगिनं
  दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसम्भवम् ||५||

गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं
  सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनम् |
  नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलम्पटं
  नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम् ||६||

समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकमोदनं
  नमामि कुंजमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम् |
  निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं
  रसालवेणुगायकं नमामि कुंजनायकम् ||७||

विदग्धगोपिकामनोमनोज्ञतल्पशायिनं
  नमामि कुंजकानने प्रव्रद्धवन्हिपायिनम् |
  किशोरकान्तिरंजितं दृअगंजनं सुशोभितं
  गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम् ||८||

यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा
  मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम् |
  प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान
  भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान ||९||


English Verse


Bhaje vrajaika mandanam, samastha papa khandanam,
Swabhaktha chitha ranjanam, sadaiva nanda nandanam|
Supincha gucha masthakam, sunada venu hasthakam,
Ananga raga sagaram, Namami Krishna nagaram||

Manoja garva mochanam vishala lola lochanam,
Vidhootha gopa sochanam namami padma lochanam|
Kararavindha bhoodaram smithavaloka sundraram,
Mahendra mana daranam, Namami Krishna varanam||

Kadhambha soonu kundalam sucharu ganda mandalam,  
Vrajanganaika vallabham namami Krishna durlabham. 
Yasodhata samodhaya sagopaya sananandaya, 
Yutham sukhaika dayakam namami gopa nayakam||

Sadhaiva pada pankajam madheeya manase nijam, 
Dadanamuthamalakam , namami Nanda balakam,
Samastha dosha soshanam, samastha loka poshanam,    
Samastha gopa manasam, Namami nanda lalasam||

Bhoovo bharavatharakam bhavabdi karma dharakam, 
Yasomathee kisorakam, namami chitha chorakam.
Drugantha kantha banginam, sada sadala sanginam,
Dine dine navam navam namami nanda sambhavam||

Gunakaram sukhakaram krupakaram krupaparam,
Suradwihannikarthanam, namami gopa nandanam.
Naveenagopa naagaram naveena keli lampatam, 
Namami megha sundram thathith prabhalasathpatam ||

Samastha gopa nandanam, hrudambujaika modhanam, 
Namami kunja madhyagam, prasanna bhanu shobhanam.
Nikamakamadhayakam drugantha charu sayakam,       
Rasalavenu gayakam, namami kunja nayakam|| 

Vidagdha gopikaa mano manogna thalpasayinam,      
Namami kunja kanane pravrudha vahni payinam.
Kisorakanthi ranchitham, druganjanam sushobitham,   
Gajendra moksa karinam,Namami sri viharinam|| 

Yadha thadha yadha thadha thadiva krushna sathkadha, 
Maya sadaiva geeyathaam thadha krupa vidheeyathaam.
Pramanikashtakadwayam japathyadheethya ya pumaan,  
Bhaveth sa nanda nandane bhave bhave subhakthiman||


Translation
1) Eternally I worship Lord Krsna, who is Nanda's son, who is Vraja's sole ornament, who breaks all sins into pieces, and who delights the devotees' hearts. I offer my respectful obeisances to the hero Lord Krsna, whose head is decorated with peacock feathers, whose hand holds a melodious flute, and who is an ocean of Kamadeva's pastimes.


2) I offer my respectful obeisances to lotus-eyed Lord Krsna, who frees Kamadeva of his pride, whose large eyes are very restless, and who shakes away the gopas' sadness. I offer my respectful obeisances to dark Lord Krsna, whose lotus hand lifted Govardhana Hill, whose smiling glance is charming, and who ripped Indra's pride into shreds.


3) I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is difficult to attain, who wears a kadamba-flower earring, the circle of whose cheeks is very charming, and who is the only beloved of Vraja's girls. I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is a playful cowherd boy, and who, in the company of Yasoda, Nanda, and the gopa people, enjoys pastimes that delight them all.


4) I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is Nanda's small boy, and who eternally places His kunkuma-anointed lotus-feet in my heart. I offer my respectful obeisances to cheerful Lord Krsna, who dries up all faults, makes all worlds prosper, and stays in the thoughts of all the gopa people.


5) I offer my respectful obeisances to the milk-thief Lord Krsna, who removed the earth's burden, who is the captain of the ship to cross the ocean of birth and death, and who is Yasoda's teenage son. I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is Nanda's son, who casts crooked glances from the corners of His eyes, who always stays with the gopis, and who day after day enjoys newer and newer pastimes.


6) I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is a jewel-mine of transcendental qualities, a jewel-mine of transcendental bliss, a jewel-mine of mercy, who defeats the demigods' enemies, and who delights the cowherd people. I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who is a young hero of the cowherd people, who is a playful young rake, who is handsome and dark like a monsoon cloud, and whose yellow garments glisten like lightning.


7) I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who delights all the cowherd people, who charms the devotees' lotus-hearts, who stays in forest groves, and who is splendid like a glistening sun. I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who fulfills all desires, whose sidelong glances are charming arrows, whose flute music is nectar, and who is the amorous hero of the forest groves.


8) I offer my respectful obeisances to Lord Krsna, who reclines on the charming couch of the wise gopis' hearts, and who drank up a forest fire in Munjatavi forest. I pray that whenever and however I sing His glories, Lord Krsna will be merciful to me.


9) I pray that whoever reads or recites these eight prayers will be fervently devoted to Nanda's son, devoted birth after birth.






Disclaimer: I do not own the copyright for the audio content in this video
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